लेखनी कहानी -07-Feb-2023
मेरी मुन्नी
’’ मेरी मुन्नी नखरीली, शर्मीली और सुन्दर। ’’ नयन अपनी सात साल की बेटी को गोद मंे उठा कर उसको मनाने की कोशिश कर रहा था, मगर वो छोटी सी बच्ची किसी भी तरह मानने को तैयार नहींे थी। वो जीद्द में इतने गुस्से में थी कि अपने पापा की तरफ देख भी नहीं रही थी।
ऐसे तो नयन को पता था कि मुन्नी का इलाज तो मेरी जेब में है। काले रंग की चमचमाती पन्नी में कैद चाॅकलेट निकाल कर आगे बढ़ाया तो नयन को आभाष हुआ कि ये तो उसका भ्रम था। मुन्नी तो चाॅकलेट लपकने के बदले गोद से उतरने की जीद्द करने लगी।
नयन थोड़ा सा झल्ला गया और पुछा ’’ आखिर क्या चाहिए ? ’’
मुन्नी ने लड़खड़ाती तुतलाती आवाज में कहा ’’ तुछ नहीं। ’’
’’ तो उदास क्यों बैठी है मेरी मुन्नी ? ’’
’’ तुछ भी नहीं। ’’
मुन्नी की उदासी का कारण अब भी नयन की समझ से परे था।
चाॅकलेट का पन्नी फाड़ कर ज्योंहीं चाॅकलेट खाने के लिए नयन ने अपना मुँह खोला, उसी समय मुन्नी चाॅकेलट लपक कर गोद से उतर गयी और दोड़ कर भाग गई।
समाप्त
Gunjan Kamal
09-Feb-2023 07:04 PM
👌👌👌
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डॉ. रामबली मिश्र
09-Feb-2023 08:38 AM
बेहतरीन
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पृथ्वी सिंह बेनीवाल
07-Feb-2023 10:41 AM
👌👌
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