Rajan tiwari

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नज़र का तीर


1212-1122-1212-22/112

नज़र का तीर कुछ ऐसे जिगर के पार किया,
निगाहे शोख़ से इक पल में ही शिकार किया//1

गया वो लेके मिरे दिल को, दे गया आँसू,
यहां भी उसने मुनाफ़े का कारोबार किया//2

लरज़ रहे थे मिरे पॉव फिर भी चलता रहा,
कि बहरे ग़म को बड़ी मुश्किलों से पार किया//3

वो झूठ इतने सलीके से कह गया देखो,
कि उसकी बात पे दुन्या ने ऐतबार किया//4

अमीरे-शह्र की हर इक खता मुआफ़ हुई,
जो था गरीब उसे सब ने संगसार किया//5

बड़ी अजीब रही दिल की दास्तां 'राजन',
जो था गुनाह, वही इश्क़ बार बार किया//6

      'राजन'
   इंदौर (म.प्र.)
7898897777

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