विदाई
बिदाई.....
अश्रू नयन भर डोली चढ़ी
घर आंगन जहां पली बढ़ी
मां बाबुल की देहरी
विदाई की इस बेला में छोड़ रही
अपने पीछे अन्न के दाने
मेंहदी रचे इन हाथों से लगा अपने भाल
अपनी झोली में रख लेना इन्हें संभाल
आऊंगी मैं कभी कभी चुनने बन चिड़िया सी
नेह बंधन में खींची खींची सी
दे देना मुझको अपना स्नेह अपार
बस यही अनमोल उपहार
अपने मन आंचल में बांध सदा को रख लूंगी
मां बाबुल तेरे आंगन में संयम से
रिश्ते की डोर संभाल।।
शैलजा ☘️
#लेखनी प्रतियोगिता
Nitish bhardwaj
18-Sep-2021 09:06 PM
वाह बहुत खूब
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Shailja Gupta
18-Sep-2021 09:44 PM
धन्यवाद सर🙏
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Seema Priyadarshini sahay
18-Sep-2021 08:13 PM
बहुत खूबसूरत..
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Shailja Gupta
18-Sep-2021 09:45 PM
धन्यवाद 🙏
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Swati chourasia
18-Sep-2021 07:35 PM
Very beautiful 👌👌
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Shailja Gupta
18-Sep-2021 09:45 PM
धन्यवाद 🙏
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