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गाँव लेखनी प्रतियोगिता -19-Mar-2023

वो माटी की खुशबू और बरगद के पेड़ की छाँव,
वो बरसात का मौसम और कागज की तैरती नाव।
वो मटमैले से कपड़े और रेत से सने पाँव।
भुलाये नहीं भूला जाता वो मेरा प्यारा  गाँव।

वो कोयल की कू कू और कौए की काँव काँव,
दादी नानी के पास ही होती सब बच्चों की ठोर ठाँव।
सितोलिया और छुपम छुपाई पर ही लगते थे सारे पेंच दांव,
भुलाए नहीं भूला जाता वो मेरा प्यारा गाँव।

बिना डॉक्टर के ही ठीक हो जाते थे सारे घाव,
चवन्नी हो जेब में तो हम कहलाते थे राव।
पणिहारि पानी निकालने को कुए में डाले गगरी-लाव।
भुलाये नहीं भूला जाता वो मेरा प्यारा गाँव।

जानवरों से भी होता था इंसानों का सा लगाव,
हर त्यौंहर मनाने का अलग ही था चाव।
नौकरी करने को हम निकल आयें हैं मीलों दूर,
लेकिन फ़िर भी................................
भुलाये नहीं भूला जाता वो मेरा प्यारा गाँव।

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4 Comments

कमाल की रचना 👌👌

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Swati chourasia

20-Mar-2023 07:15 AM

बहुत ही खूबसूरत रचना

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बहुत ही सुंदर सृजन

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