जोकर..!
शाम के सात बज रहे थे. रवि बालकनी में चहलकदमी कर रहा था. बारबार घड़ी में वक़्त देख रहा था. उतने में डोरबेल बजी. रवी ने जाकर दरवाजा खोला.
"कितनी देर शिवानी..! तुझे पता है ना मुझे आँठ बजे एक पार्टी में पहुँचना है." शिवानी के आते ही रवी ने चिल्लाकर कहा.
"अरे अंदर तो आने दो... आपको तो पता ही है यहाँ की ट्रैफ़िक के बारें में. सॉरी सॉरी... और आप अभी तक तैयार क्यूं नहीं हुये..?" शिवानी ने कहा.
"सही बताऊ शिवानी मुझे जाने का मन नहीं कर रहा है. क्या पता क्यू आज मन में बोहोत बेचैनी हो रही है." रवी ने कहा.
"अपने मन से गलत ख़याल निकाल दो रवी और जाकर तैयार हो जाओ." शिवानी ने उसे धक्का देकर कहा.
रवी तैयार होने के लिये अंदर चला जाता है. कपड़े बदल कर वो शिवानी के सामने आकर खड़ा हो जाता है.
"वाह..! कितना अच्छा दिख रहा है मेरा जोकर... तू बर्थडे पार्टीज में जोकर का काम करता है, इस बात का बुरा मत मानना. कोई भी काम छोटा नहीं होता." शिवानी ने कहा.
रवीने हँसकर उसका अभिवादन किया और पार्टी के लिये निकल गया.
"गायत्री बंगला.. झा साहब का यही बंगला है ना..?" बताये स्थल पर पहुँचकर रवी ने सिक्योरिटी से सवाल किया.
"हाँ.. आपको किससे मिलना है..?" सिक्योरिटी ने सवाल किया.
"मानसी झा.. आपके मालिक की बेटीसे... जिसका आज जन्मदिन है ना.. मुझे बुलाया गया है पार्टी के लिए."
वॉचमैन उसे अंदर जाने के लिये रास्ता दे देता है.
रवी बंगले के अंदर दाखिल होता है. डोरबेल बजाता है. कोई भी दरवाजा नहीं खोलता. दरवाजे को जोर जोर से पिटता भी है, लेकिन कोई फायदा नहीं होता. रवी बहुत देर तक वहाँ खड़ा रहकर राह देखता रहता है.
झा साहब को कॉल करने का प्रयास भी करता है. लेकिन फ़ोन कोई भी नहीं उठाता.
आज जन्मदिन है और आसपास कोई भी नहीं. इतनी शांति. बंगला भी सजाया नहीं गया था. बाहर कोई दिख भी नहीं रहा. रवी के मन में गलत खयाल आने लगते है. खौफ़ के मारे उसके माथे से पसीने छूटने लगते है.
एक आखरी कोशीश करते हुये रवी वापस पीछे मुड़कर मेन गेट की तरफ़ जाने लगता है. परंतु वॉचमैन अपनी ड्यूटी खतम करके कब का निकल चुका था.
रवी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था. वो वापस बंगले की तरफ़ जाता है और इस बार खिड़की से अंदर झाँककर अंदर कोई है क्या ये देखने की कोशिश करता है. लेकिन अंदर कोई भी दिखाई नहीं देता. ना सजावट ना मेहमान ना कुछ तैयारी..
एक अजीब सी उलझन में पड़ गया था रवी. उसे लगने लगा कि किसी ने तो उसके साथ मजाक किया है. वो जाने की सोच ही रहा था उतने में उसको पीछे से एक सर्द आवाज सुनाई देती है.
"जोकर अंकल मेरे लिए एक गाना गाओ ना..."
चौंककर रवी ने पीछे मुड़कर देखा तो... एक पांच साल की छोटी लड़की.. शरीरपर सफेद फ्रॉक.. सर पर सफेद रिबिन, और हाथों में लाल बलून.
"जोकर अंकल मेरे लिए एक गाना गाओ ना.." उस लड़की ने वही बात वापस दोहराई.
रवी सहमी हुयी आवाज से उससे पूछता है, "कौन है तू और इधर अकेली क्या कर रही है..?"
"आप मेरे जन्मदिन के लिये आये हो ना..!" लड़की ने पूछा.
"हाँ लेकिन तुम्हारे माँ बाप कहाँ पर है..?" उसने दूसरा सवाल किया.
"वो तो निकल गये मुझे अकेले छोड़कर.. ये लो बलून.." उस लड़की ने मासूमियत से कहा.
इतना बोलकर उस लड़की ने वो बलून रवी के आगे किया.. डरते हुये रवी ने वो बलून उसके हाथ से ले लिया. औऱ जैसे ही उसने वो बलून अपने हाथोंमें थामा अचानक बंगले के अंदर की सभी लाइट्स चली गयी और एक जोरदार धमाका हुआ उस बलून के फटने का.
दूसरे दिन जब रवी को होश आया तो उसने अपने आप को हॉस्पिटल में पाया. उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हुआ. उसके बाएँ हाथ में खरोंच थी, जैसे किसी जानवर ने अपनी नाखून से उसे नोचा हो.
उतने में शिवानी कमरे के अंदर आती है.
"शिवानी मुझे क्या हुआ है...! और मैं इधर कैसे... मैं तो उधर...." रवी.
"शांत हो जाओ... कल आप पार्टी में गये थे और देर रात तक लौटे ही नहीं. मैं रात के एक बजे तक राह देखती रही. कितनी बार तुझे फोन किया... घंटी बज रही थी लेकिन तू उठा नहीं रहा था. इसलिये मेरे पास कोई चारा नहीं था पोलिस को फोन करने के अलावा." शिवानी ने कहा.
उतने में इंस्पेक्टर पवार अंदर आते है.., "ये इंस्पेक्टर पवार इनकी पेट्रोलिंग गाड़ी को तू बेहोश हालात में मिला." इंस्पेक्टर की तरफ देखते हुए शिवानी ने कहा.
"बरखुरदार आप उस निर्जन जगह क्या कर रहे थे..?" इंस्पेक्टर ने सवाल किया.
"निर्जन..! मुझे तो झा साहब ने उनकी बेटी की जन्मदिन की पार्टी में बुलाया था. मानसी नाम है उनकी लडक़ी का. परंतु वो जगह निर्जन नहीं थी. मैं कल गया था उधर, उनका बड़ा बंगला है उधर. मैंने वॉचमैन से मुलाक़ात भी की. आप उसको पूछ सकते हो." रवी ने कहा.
इंस्पेक्टर पवार ने उसके हाथ में एक पेपर कटिंग दिया और कहा, "ये खबर पढ़ो.." और सामने आयी खबर को पढ़कर रवी के रोंगटे खड़े हो गये.
'..कांदिवली पूर्व के समता नगर में स्तिथ गायत्री बंगले को कल शॉर्टसर्किट की वजह से आग लग गयी थी. इस आग की चपेट में पूरा बंगला आ गया और झा का परिवार उसमें जलकर राख हो गया. लेकिन उनकी एक पांच साल की बेटी का अभी तक कोई अतापता नहीं है. पोलिस अभीतक उसको खोज रही है...'
"लेकिन ये कैसे हो सकता है..?" रवीने झल्लाहट भरे स्वर में कहा.
"उस खबर की तारीख देखो." इंस्पेक्टर ने कहा.
"24 सितंबर 2020 और आज की तारीख 24 सितंबर 2021.." रवी ने चौंककर कहा.
"इस घटना को हुए एक साल हो गया है. अब उस बंगले की जगह सिर्फ बंगले के मलबा ही बचा है.. और आग की लपटों के निशान के अलावा वहाँ कुछ भी नहीं है. जिस दिन ये घटना हुयी उस दिन उस लड़की का जन्मदिन था यानी कि 23 सितंबर 2020 को. हम पिछले एक साल से उस लड़की को ढूँढने का प्रयास कर रहे है, लेकिन अभीतक वो मिली नहीं. आपको कुछ दिखा क्या उधर..?" इंस्पेक्टर ने सवाल किया.
Shalini Sharma
05-Oct-2021 03:10 PM
Nice
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Fiza Tanvi
04-Oct-2021 03:42 PM
Superb
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🤫
27-Sep-2021 04:08 PM
बेहतरीन....डर और रोमांच का अनूठा संगम..!
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pk123
27-Sep-2021 10:49 PM
Shukriya
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