Gopal Gupta

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वृंदावन की कुंजी गलीन मे,

जीते जी है मरकर देखा,

जो था पाया खोकर देखा,

खुद को पाया बहुत अकेला,
 जो खुद के ही भीतर देखा,,

जग का मेला सजा हुआ है,
रेला पेला लगा हुआ है,,

 भक्ती माया भक्त है जानें,
 कण कण मे है ईश्वर देखा,, 

 करे मदारी है जो डुगडुग 
नाचे उस पे बंदर देखा,,

प्रेम जगत का सत्य रे भगता,
प्रेम जगत जीवन अधार,,

वृंदावन की कुंजी गलीन मे, 
रास रचाता गिरधर देखा,,

बीज मंत्र का उद्गम स्थल,
और वेदों का सार यही है,

ॐ कार ही निर्रकार है,
और मुक्ति का द्वार यही है,,

रोग दोष दुख दूर भगाए
ॐ कार वह अक्षर देखा,,

Gopal Gupta "Gopal "

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3 Comments

Babita patel

24-Apr-2023 01:46 PM

nice

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Punam verma

17-Apr-2023 09:32 AM

Very nice

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बहुत खूब

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