लेकर
ज़िन्दगी ना सही कज़ा लेकर
हम से मिलना तो हौसला लेकर
मुझ से मिलने की उस को जल्दी थी
ग़म भी आया मेरा पता लेकर
मुश्किलें हल सदा तेरी होंगी
चल बुज़ुर्गो का मशवरा लेकर
सच से जिन का न वास्ता कोई
पास आए वो आइना लेकर
वक़्त बदला हमें पढ़ा ते हैं
कल गये थे जो मशवरा लेकर
We we 1A
रात आँखों में है कटी अपनी
याद आई थी रतजगा लेकर
हर तरफ ख़ौफ़नाक मन्ज़र हैं
हम करें भी तो क्या दुआ लेकर
लिख ग़ज़ल तू नई कोई गुप्ता
दर्द का फिर वो काफ़िया लेकर
Gopal Gupta "Gopal "
Muskan khan
21-Apr-2023 06:21 PM
Well done
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Reena yadav
21-Apr-2023 09:49 AM
👍👍
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