Dil
दूर कही एक चिराग जल रहा था।
ख्आब कही उम्मीद का पल रहा था।।
जिंदगी की धूप से तजता हुआ सा वो
कोई यु ही बस चुपचाप चल रहा था।।
अंजान न था जींवन के सफर से परिन्दा
गिर गिर कर वो बार बार सम्भल रहा था।।
ठोकरों ने है सिखाया सबक-ए-जिंदगी
खाली पेट में आंतो का पकबान तल रहा था।
शर्त लगा रखी थी लब की आहो से
दिल के हर जख्म पे गम-ए-बाम मल रहा था ।।
मुझ को मिले छाव को दरख्त-ए-खजूर
ख्आब की बादी में जैसे गम घुल रहा था।।
वो माँगते है सिला आज महोबतो का हम से
जिन का छोड़ के जाना कभी हमे खल रहा था।।
Goapl Gupta "Gopal "
Abhinav ji
04-May-2023 08:24 AM
Very nice 👍
Reply
अदिति झा
04-May-2023 07:41 AM
Nice 👍🏼
Reply
Varsha_Upadhyay
04-May-2023 12:19 AM
बहुत खूब
Reply