Gopal Gupta

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Dil

दूर कही एक चिराग जल रहा था।
ख्आब कही उम्मीद का पल रहा था।।

जिंदगी की धूप से तजता हुआ सा वो 
कोई यु ही बस चुपचाप  चल रहा था।।

अंजान न था जींवन के सफर से परिन्दा 
गिर गिर कर वो बार बार सम्भल रहा था।।

ठोकरों ने है सिखाया  सबक-ए-जिंदगी
खाली पेट में आंतो का पकबान तल रहा था।

शर्त  लगा रखी थी लब की आहो से
दिल के हर जख्म पे गम-ए-बाम मल रहा था ।।

मुझ को मिले छाव को दरख्त-ए-खजूर 
ख्आब की बादी में जैसे गम घुल रहा था।।

वो माँगते है सिला आज महोबतो का हम से
जिन का छोड़ के जाना कभी हमे खल रहा था।।

  Goapl Gupta "Gopal "

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3 Comments

Abhinav ji

04-May-2023 08:24 AM

Very nice 👍

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अदिति झा

04-May-2023 07:41 AM

Nice 👍🏼

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Varsha_Upadhyay

04-May-2023 12:19 AM

बहुत खूब

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