माॅं
मां
मैं मां की अरमान थी।
मां तो मेरी वरदान थी।
चा हती थी मां मुझसे,
हर किसी की प्रेरणा बनू,
बेटी के नाम से सदा मेरी
इस जग में पहचान हो।
मैं अच्छी परवरिश दी है,
जन जन का सम्मान करो।
आज सितारों के बीच मां,
मुझे ही निहारा करती है।
डगमगाए ना मेरी कदम,
शायद विचारा करती है।
सुन ले मेरी मां जहां मैं,
अ प नी पैर पसारी हूं।
वहां हंसो की टोली है,
दुआओं में फलती हूं।
तूने जो दी सर जमीं,
अपनी व्यवहारों की।
उन्हीं से गुलशन को,
सहजता से महकाऊं।
डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार
ऋषभ दिव्येन्द्र
14-May-2023 10:55 PM
खूब लिखा आपने 👌👌👏👏
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