बिन आंखें छपके एक-पल..एक-टक निहारती थीं..
सूकुन और राहत की.. छाया के जैसी ...
स्नेह लिए आंचल में...एक साया के जैसी ..
ओहदे में ईश्वर का रूप ही तो लगती थी..
हर दर्द में मेरे वो आंसू बहाया करती थी..
कितना सहेजती थी..मेरे लिए वो सबकुछ..
संसार भर की खुशियां ..जैसे समेट लेती थी..
वो जैसे बातों में ही सब-कुछ समझ ही लेती थीं
ना खुद की कोई चिंता.. परवाह नहीं क्षण भर..
हम सब के लिए जीती थी.. वो प्यार लिए दामन भर..
लिपटकर,लरझना.. हर बात उससे कहना...
कभी एक पल भी ..उसके बिना न रहना..
नजरे ना देखें मेरी...जब कभी उसे एक क्षण..
तो आंखों में अजब सी ..तलाश भर जाती थी..
बेवक्त चले जाने से ..दर्द भरा नस-नस में..
अब नींद नहीं आती है.. बस करवटें बदलते
ये रात गुजर जाती है..
इस बेदर्दी वक्त ने ..इस कदर उसको छीना...
बस देखने को अब तो.. ये आंखें तरस जाती हैं....
मां..याद बहुत आती है...
__अखण्ड मिश्रा
(स्वरचित, मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित)
संग्रह - मां... तुम्हारी यादें...
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ऋषभ दिव्येन्द्र
19-May-2023 12:30 PM
जबरदस्त
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AKHAND MISHRA
21-May-2023 10:45 AM
आभार आपका आदरणीय
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shahil khan
19-May-2023 08:51 AM
Nice
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AKHAND MISHRA
21-May-2023 10:44 AM
धन्यवाद
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Abhinav ji
18-May-2023 09:03 AM
Very nice 👍
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AKHAND MISHRA
18-May-2023 01:23 PM
आभार आपका
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Reena yadav
19-May-2023 04:39 AM
Shukriya 😇
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