ग़ज़ल
कहो झूठ को सच बना कर दिखाऊं,
हथेली पे सरसो जमा कर दिखाऊं,,
कभी ये दुबारा है चढ़ती न हीं पर,
चलो काठ हाँडी चढ़ा कर दिखाऊं,,
मुझे 'इश्क़ ने है बनाया क़लंदर,
हवाओं मे चराग़ जला कर दिखाऊं,,
सभी कुछ ज़माने में मुमकिन हुआ है,
बिना पर बशर को उड़ा कर दिखाऊं,,
नज़र ने नज़र से कहा ये मेरी-जाँ,
बिना ज़ाम के मय पिला कर दिखाऊं,,
सभी कुछ ज़माने में मुमकिन हुआ है,
बिना पर बशर को उड़ा कर दिखाऊं,,
Gopal Gupta "Gopal "
Gunjan Kamal
26-May-2023 08:20 AM
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌
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ऋषभ दिव्येन्द्र
25-May-2023 04:46 PM
बहुत ही बेहतरीन
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Varsha_Upadhyay
25-May-2023 03:33 PM
बहुत खूब
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