बातें
भूल कर के किताब की बाते,
हो रही बस हिज़ाब की बाते,,
ज़िन्दगी चार दिन कि जी इस को,
छोड़ करना .. 'अज़ाब की बाते,,
जिस कि साँसों मे ज़हर है ख़ालिस,
उस के लब पे ......गुलाब की बाते,,
उन को शायद समझ नहीं आती,
क्या करू... जी जनाब की बाते,,
आख़िरी सच कज़ा का आना है,
छोड़ प्यारे ....रिकाब की बाते,,
मुझ को बैचेन है ...बहुत करती,
यार शब -ए -आफ़ताब की बाते,,
हम से मिलना ...उदास रातों में,
तुम से करनी है ख़्वाब की बाते,,
आग दामन से है.. लिपटी मेरे,
मुझ से करना ये ख़ाब की बाते,,
Gopal Gupta "Gopal "
सीताराम साहू 'निर्मल'
03-Jun-2023 07:50 AM
बहुत खूब
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Varsha_Upadhyay
02-Jun-2023 07:34 PM
बहुत खूब
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वानी
02-Jun-2023 04:24 PM
Suprb
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