हम सब एक जैसे है
हम खुद को हमेशा दुत्कारते है, हमेशा स्वयं को छिपा कर एक अलग ही इंसान दिखाते है, अपने सच से मुझको डर लगता है, इसलिए बहुत ज्यादा निजी रखता हूँ, मैं दर्पण दिखाना पसंद करता हूँ मैं ही नहीं बल्कि सभी करते है और सब मेरी तरह ही डरते है।
इसका मतलब तो एक ही है कि हम सबके सब एक जैसे ही है। साथ ही एक बात और हिंदी वाले क्षमा करें, यहाँ हम का मतलब मैं ही हूँ, ये तो बस बिहारी फुट है जो पता नही कहाँ से आ गया है हमारी बोली में, खैर अतिक्रमण का दौर है तो कर लिया है हमने भी अतिक्रमण हम पर और जोड़ लिया है अपने शब्दकोष में।
खैर छोड़ो आज हम की बात ही नही है बल्कि हम स्वयं की बात कर रहे है। और ये बात ये है कि सारे इंसान एक जैसा सोचते है। इंसानों को जो लगती है एक दूसरे में विषमता, जो दिखता है अलगाव, जो समझ आती भिन्नता वो उतनी सत्य नही होती है, क्योकि सबको झूठ से नफरत होती है, सबको सच से प्यार होता है, मगर फिर भी सब सबके सामने सबसे अच्छे बनने का छलावा रचते है। सब एक दूसरे से भिन्न दिखाने का स्वांग रचते है। सबने भृम को जीवन बना लिया है। जबकि हम सबका अटल सत्य तो एक ही है कि हम सब एक जैसे है - झूठे मक्कार फरेबी क्रूर दुराचारी स्वार्थी नीच अपराधी औऱ पापी।
बस विडंबना ये है कि, हम कभी स्वीकारते नहीं जबकि जानते हम भी है और तुम सब भी...
Gunjan Kamal
24-Jun-2023 11:55 PM
👏👌
Reply
shweta soni
22-Jun-2023 10:36 AM
👌👌
Reply
वानी
08-Jun-2023 07:27 PM
Nice
Reply