Indu kumari

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हमसफ़र

यादों का सफर

 यादों का सफर है सुहाना सफर, 
घूम आते वहां होकर हम बेखबर। 
नहीं जाना कहीं नहीं आना कहीं, 
खो जाते वही जहां यादों का शहर। 

आईने की कहीं है जरूरत नहीं, 
अक्स आंखों में यू हीं आते नजर।
ये कैसा सफर लगे किसी को न खबर। 
यादों का सफर है सुहाना सफर। 

हसीन कल्पनाओं में खुशियां मनाते रहे 
उन फिजाओं में हम गुनगुनाते रहे।
उन पलों को जीने की छोड़े ना कसर
यादों का सफर है सुहाना सफर।

जिंदगी हाथों से फिसलती रही ,
यादों की वो लड़ियां आंखों में रही। 
वह लम्हे ही अब बन गए हमसफर ,
यादों का सफर है सुहाना सफर  
डॉ इन्दु कुमारी
            मधेपुरा बिहार

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6 Comments

Gunjan Kamal

13-Jun-2023 01:42 AM

👌👏

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बहुत ही सुन्दर

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Abhinav ji

12-Jun-2023 08:56 AM

Very nice 👍

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