परिंदा
ज़ीस्त को यूँ चलो बचाया जाए,,
सच को चल कर अभी हराया जाए,
जो परिंदा है कैद मुठ्ठी में
शाह से है उसे बचाया जाए,,
अपने घर ही में खो गया हूँ मै
मुझ को आवाज़ दे बुलाया जाए,,
रौशनाई ग़ज़ल को देने को,
चाँद कागज़ पे है उतारा जाए,,
फूल चुन कर निशात से गोपाल,
ज़िन्दगी को चलो सँवारा जाए,,
2122 1212 २२
गोपाल गुप्ता
पृथ्वी सिंह बेनीवाल
24-Jul-2023 08:21 PM
👏👍🏼
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