Rishabh tomar

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मुझे महकाते हो

जब पास मेरे आ जाते हो
फूलों सा मुझे महकाते हो

पर बात बताकर जाने की
तुम जाने क्यों तड़पाते हो

मेरे बातें तुम हर पल करते
पर सामने क्यूँ? शर्माते हो

छुपछुप के मुझे तकते लेकिन
पर देख के क्यूँ? छुप जाते हो

मैं सोचता हूँ, क्या मैं पसन्द?
जितना तुम मुझको भाते हो

मन हो मृदंग बज उठता है
जब तुम पायल खनकाते हो

हर स्वप्न की ये ही कहानी है
मुझको जयमाला पहनाते हो


बन ख्याब रात मिलने आते
पर सुबह कहाँ उड़ जाते हो

जब पूछता हूँ और हाल है क्या
सच बिन सब तुम बतलाते हो

लिखकर मेरा नाम हथेली पर
मुझसे ही क्यो? झुठलाते हो

गर प्यार है तो हँसकर बोलो
प्रियवर क्यो मुझे सताते हो?

मेरा सब कुछ तुम पर अर्पण
क्योंकि मुझको तुम भाते हो

जब पास मेरे तुम आते हो
फूलों सा मुझे महकाते हो

ऋषभ तोमर

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1 Comments

kashish

05-Oct-2023 09:30 AM

Amazing

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