लेखनी प्रतियोगिता -17-Oct-2023
#दिनांक :-17/10/2023
#शीर्षक:- हक ना जता पाऊँ
जीजा एक सम्बोधन मात्र,
जी जा अब से भी येही बताना चाहती ,
मुझे देखकर वह शरमाती,
जीजा-जीजा मुझे बुलाती ।
शादी के बाद से,
जब भी ससुराल जाता ,
आव-भगत तो खूब होता,
पर कुछ कसक मेरे मन में ही रह जाता ।
अकेले में बात करना चाहूँ ,
कुछ हँसी-मजाक से दिल बहलाना चाहूँ ,
साली के साथ बैठ कुछ समय बिताना चाहूँ,
पर असफल हर बार हो जाता ।
दूर से हमेशा साला मुझे ताड़ता,
कुछ एकांत का गर मौका मिल जाता,
ससुर खांसते मेरे पास आ धमकता ।
ऐसी मेरी हालत दोस्तो,
मैं कैसे, क्या-क्या बताऊँ,
साली लगती आधी घरवाली ,
पर एक चौथाई भी,
हक ना जता पाऊँ।
तुम वही हो मेरे दिल की चैन
पर तुम्ही से ये बात बता ना पाऊँ
(स्वरचित)
प्रतिभा पाण्डेय "प्रति"
चेन्नई
Mohammed urooj khan
18-Oct-2023 05:45 PM
👌👌👌👌
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Milind salve
18-Oct-2023 08:27 AM
Nice 👍🏼
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हरिश्चन्द्र त्रिपाठी 'हरीश',
18-Oct-2023 12:55 AM
वाह वाह।
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