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पनघट

मंच को नमन 

विषय पनघट

संगम है विचारों का, एकता को दर्शाता है। 
पनघट वह स्थल है, जो प्रेम की गंगा बहाता है। 

पनघट से भरा जल, हो जाता है अमृत समान। 
थके हारे को मिलती राहत, मिट जाती थकान।

पनघट पर ही गांव की ग़ौरी, भरकर लाती मटकी।
शक्ल सूरत हाव भाव से, नजर कहीं पर अटकी। 

बेसब्री से इंतजार कोई, पनघट पर करता है।
दिल का करार आए, आस में मटके भरता है। 

सद्भाव के फूल खिले, संपन्नता घर घर आती। 
पनघट की वो मीठी बातें, अब याद बहुत आती। 

अब तो पनघट रहे नहीं, घट गया दिलों का प्यार। 
मां बाप को आंख दिखाते,कैसा यह संस्कार।

रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान

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5 Comments

बहुत खूब 👌👌

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Niraj Pandey

19-Oct-2021 11:16 AM

बहुत खूब

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kapil sharma

19-Oct-2021 10:37 AM

🙏🙏🙏

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