Rajeev kumar

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प्यार है खेेल

प्यार है खेेल

महकी हुई फिजाएं पूरे माहौल को खुशनूमा औेर संगीतमय बनाए हुई थी। माहौल ऐसा कि तन्हाई में कोई गायक पैदा कर दे, सुर की समझ न भी होे तो फिर भी दिल में मचलते जज्बातोें को कोई गुनगूनाने पर अमादा हो जाए।
राहूल ने अपनी कलाई घड़ी देखी और गीत गुनगूूनाने लगा ’’ खुश्गवार मौसम में इन्तजार मुश्किल, क्या करूं अब इस तड़प् का, तु ही बात ऐ दिल। ’’
गीत गाने के बाद राहूल मन ही मन बूदबूदाता है ’ यार दिव्या, कमाल है, मैं इस शहर से दुर था, तब भी तेरा इन्तजार था और अब मैं इस शहर में हूूं फिर भी तुम्हारा इन्तजार है।
कभी-कभी बहूत ज्यादा इन्तजार शिकायतों की उम्र को लम्बी कर देता है। राहूल के मन में बैठी ढेर सारी  शिकायतें थीं, राहूल को ख्याल आया कि आज सारी शिकायतों का कारण जान लूंगा।
आखिरकार इन्तजार की घड़ी खत्म हुई और महसूस किया कि बेेख्याली में दिव्या से कितना इन्तजार करवाया होगा, न जाने वो कब से खड़ी थी। राहूल ने महसूस किया कि दिव्या कुछ सहमी हुई है।
राहूूल ने आवाज लगा कर कहा ’’ आओ दिव्या, मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई शिकायत नहीं  है।
दिव्या पास आई और बोली ’’ माफ करना राहूल, अब मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती। ’’ और तेज कदमों से निकल गई।
दिव्या ने बहूत बड़ी बात कह कर राहूल की सारी  शिकायतों का  अंत कर दिया।

समाप्त

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6 Comments

Rupesh Kumar

18-Dec-2023 07:35 PM

Nice

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Khushbu

18-Dec-2023 05:12 PM

Nyc

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Milind salve

16-Dec-2023 09:18 PM

Nice one

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