Rajeev kumar

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सफर

सफर

बात शुरू करने का कोई मकसद ही हो ये जरूरी तोे नहीं, बात  करने का मन होना भी तो बहुत बड़ा मकसद है।
रिम्मी बात शुरू करने का सोच रही थी मगर सोेचने का काम तो यह बहूत देर से कर रही थी, जब से वो रेलगाड़ीे पर बैठी थी और रेलगाड़ी को स्टेशन छोड़ेे हुए आधा घंटा बीत चूका था। हवा से  बातें करती ट्रेन की रफ्तार के आगे रिम्मी के मन-मस्तिष्क पर उठ रही उधेरबुंद की हिल्लोेरें नतमस्तक थी।
अगर इसने दाढ़ी का मकड़जाल अपने चेहरे पर उलझाया न होता तो इसकी शक्ल थोड़ी-थोड़ी विकास से मिलती है, रिम्मी नेे सोचा।
फिर अगले ही क्षण रिम्मी ने सोचा कि हो सकता है  कि हमको कोई धोखा ही हुआ हो, और इसको मैंने आज ही थोड़े देखा था, यह तो  वन या टु क्लास की बात है।
रिम्मी को भी एहसास हो आया कि  जिससे मैं बात करने के लिए कश्मकश में हूं, वो भी सरसरी निगाह से तीन-चार बार मेरी तरफ देख चुका है।।
कुछ देेर तक दोनों निशब्द थे, मगर शुरूआत करते हुए रिम्मी ने पुछा ’’ सुनिए, आपका नाम विकास मल्होेेत्रा है ? ’’
इस  प्रश्न को सुनने के बाद सामने वाले के ललाट पर बल पड़ा, उसने  गौर से देखा और कहा ’’ हाँ, हूं तो, मगर विकास मल्होेत्रा  नहीं, विकाश मल्होत्रा नहीं, बल्कि विकास खुराना। ’’
’‘ कुछ भी हो, लेकिन विकास तो हो न, सही पहचाना न ? ’’ रिम्मी के चेहरेे पर गर्वीली मुस्कान दौड़  गई थाी।
’’ तुम, रिम्मी हो क्या ? ’’ पहचानने की सफल कोेशिश करते हुए विकास ने पुछा।
उधेड़बुद या कश्मकश का अब खात्मा हो चुका था और उसके स्थान  पपर रिम्मी और विकास को स्कुल की ढेर सारी बातें याद होे आई थी।
थोेड़ी देर चुप रहनेे के बाद विकास ने पुछा ’’ तीसरे क्लास के बाद तो तुम दुसरे शहर चली गई थी, फिर तो हमलोेग कभी नहीं मिले, फिर तुमने हमको पहचान कैसे लिया ? ’‘
’’  वोे कुछ नहीं, बस ऐसे ही पहचान लिया। ’’ रिम्मी ने बात टालने की कोशिश की लेकिन नज़रेें चुराने से विकास को कुछ छुुपाने जैसा एहसास हो आया।
’’ कहां तक जा रही हो ? ’’
विकास  के इस सवाल पर रिम्मी ने कहा ’’ अलीगढ़ जा रही हुं। ’’
बिना पुछे ही विकास ने कहा ’’’ मैं दिल्ली जा रहा हूं। ’’
रिम्मी के दिल में छुपी बात हिल्लोरें मारने लगी, अचानक रिम्मी ने कहा ’’ साॅरी। ’’
विकास ने आश्चर्यचकित होकर पुछा ’’ आखिर क्यों, अचानक से ? ’’
अगल-बगल बैठेे लोगों की जिज्ञासा को समझकर, रिम्मी थोड़ी देर चुप रही, फिर उसने पुछा ’’ दिव्या  को तुुम लााईक करते थे न ? ’’
’’ लाईक,, हां  हां, हम-दोनों एक- दुसरेे को। लेकिन तुमको कैसे मालूम ?  ’’ अब विकास की नज़र पुछताछ वाली हो गई थी।
’’ इसलिए तो साॅरी बोल रही हूं, तुुम्हारा ब्रेकअप, मैंने ही करवाया था। ’’
बात पूूरानी  होने के नाते  विकास ने खुद को सम्भालते हुए  पुुछा ’’ मगर तीसरी क्लास के बाद तो हम दोनों एक दुुसरे से कभी नहीं मिले  औेर शायद एक दुसरेे के बारे में जानते हों। अच्छाा ये बताओ, येे शुभ काम तुमने क्यों किया? ’’
रिम्मी ने स्पष्ट कहा ’’ टु क्लास में तुमने मेरी पेंसिल तोड़ी थी। ’’
अलीगढ़ में रिम्मी के उतरनेे के बाद विकास गुमसूम सा सोचता  रहा,  अफसोस करता रहा  कि पेंसिल का टुटना, जोड़ी को टुड़वा सकता है।
प्रेम के सफर का अन्त का खुलासा, विकास को इस सफर में हुुआ।

समाप्त

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6 Comments

Rupesh Kumar

18-Dec-2023 07:34 PM

Nice

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Khushbu

18-Dec-2023 05:13 PM

Nyc

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Shnaya

17-Dec-2023 02:27 PM

Nice

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