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जब तक भूख तब तक अपराध

जब तक भूख तब तक अपराध

कहावत है कि ऊपर वाले ने पेट दिया है ,तो वहीं भरेगा, अगर यह सोचकर, दुनिया एक दिन बिना हाथ पैर हिलाए बैठी रहे ,तो इस कथन की सच्चाई का प्रतिशत समाज के सामने आ ही जाएगा। ईश्वर ने पेट की भूख के साथ, इच्छाशक्ति और हाथ पैरों में अपार शक्ति भी दी है ,जिसका हम उपयोग करके ही  अपनी भूख शांत कर सकते हैं । पेट की भूख के साथ-साथ ,अनेक तरह की भूखों की बाढ़ आ गई है ,किसी को महंगे कपड़ों की भूख है ,तो किसी को नई-नई कोठियों की ,किसी को नए नए वाहनों की ,सबसे बड़ी भूख है अकूत धन की । एक चौराहे पर खड़े मजदूर से लेकर ,आलीशान कोठी में बैठे व्यक्ति तक को इस भूख ने अपनी गिरफ्त में ले रखा है। यह ऐसी भूख है जो पेट की भूख शांत हो जाने के पश्चात पैदा होती है , यह भूख अपनी शान्ति के लिए व्यक्ति से अपराध भी करा सकती है ,यह व्यक्ति को अपराध की अंधेरी दुनिया में फेंक सकती है, व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता ,उसको तो अपराधी बनाने में समाज का छुपा हाथ होता है , अपराध की जड़ में जाए बिना अपराधी को जन्मजात अपराधी नहीं कह सकते। अपराधी के अपराध को शांत करने के लिए उसका उचित दिशा निर्देशन, सजा से ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकता है । आज हम अपनी विलासिता के कारण अपराध को जन्म दे रहे हैं । हमारे ऐश्वर्य को देख कर उसे पाने के लिए व्यक्ति कुछ भी कर सकता है ।व्यक्ति हमेशा ऊपर वाले को देखता है ,ऊपर देख कर चलने के चक्कर में, वह राह में पत्थरों से टकराकर भी गिरता है ,यह पत्थर साक्षात अपराध का रूप धारण किए होते हैं । अपराधी दरअसल समाज है, जिसने उच्च और निम्न वर्ग के मध्य दीवार खड़ी कर ,नीचे वालों को चिकनी ऊंची दीवार पर चढ़ने की चाह पैदा कर, अपराध करने को मजबूर किया हुआ है । भीख मांगना अपराध है भिखारी को आप भीख न दे ,यह कहने मात्र से क्या सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती है । क्या सरकार के मांगने वालों के लिए गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा ,खाना या कपड़ा देती है ,गरीबी उन्मूलन योजनाओं का लाभ समाज के शक्तिशाली वर्ग ने प्राप्त किया हुआ है। कागजों पर योजनाएं ना चला कर, यदि गरीबी के कारणों को जानकर उनका निदान करा जाए, तब अपराध का उन्मूलन संभव है । यह भी देखें कि सहायता गरीबों तक पहुंची या बीच में ही उसका दलालों ने फायदा उठाकर अपनी इच्छापूर्ति कर अपनी गरीबी दूर कर ली । अपराध समाज की सौम्यता नष्ट कर देते हैं ।सहजता और जागरूकता द्वारा ही अपराध को नष्ट कर, हम समाज की सौम्यता को सुरक्षित कर सकते हैं ।

जया शर्मा

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6 Comments

Alka jain

16-Jan-2024 11:00 PM

Nice

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Mohammed urooj khan

09-Jan-2024 05:52 PM

👌🏾👌🏾

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Varsha_Upadhyay

09-Jan-2024 01:00 PM

Nice

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