Gopal Gupta

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गंगा

गंगा का निर्मल जल कल कल,
जीवन का राग सुनाता है,,

ये दुनियाँ आनी जानी है,
जो  आता  है सो जाता है,

इस नश्वर तन पर हे मानव,
तुझ को इतना अभिमान है क्यों,,

कुछ संग नहीं जाता फिर भी,
सच जान के भी अनजान हैं क्यों,,

 यह सत्य सनातन जीवन का,
संदेश यही है कर्म करो,,

जागो प्यारे संधर्ष करो,
तुम सभी मनोरथ सिद्ध करो,,

है  मानव तेरा धर्म यही,
थक कर क्यो बैठ गया पगले,,

जैसे रजनी के आँचल में,
अम्बर का दिनकर छिप जाए,,

गंगा का निर्मल जल कलकल,
जीवन का राग सुनाता है,,

Gopal Gupta "Gopal"

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6 Comments

Mohammed urooj khan

23-Jan-2024 01:00 PM

👌🏾👌🏾👌🏾

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Reyaan

22-Jan-2024 01:11 AM

Nice

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Rupesh Kumar

21-Jan-2024 05:54 PM

Nice one

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