क्षत्रपति शिवाजी महाराज
भारत की गरिमा पर जब,
संकट की बदरी छाई थी!
मुगलों ने घर-घर जाकर,
जमकर उत्पात मचाई थी!
मौन हो गए सारे योद्धा,
आई आपदा भारी थी!
उदय हुआ फिर क्षत्रपति का,
तलवारे हुंकारी थी!
युद्धनीति शासन-प्रबंध का,
ऐसा अद्भुत योग दिखाई!
कहर बने शत्रु पर ऐसे,
मानों जैसे प्रलय हों आई!
शासन सुख का त्याग कर दिया,
परतंत्रता नहीं स्वीकारी!
बेदम करदी मुग़ल सल्तनत,
जीते बाज़ी कभी न हारी!
इस मिट्टी का तिलक लगाकर,
भगवा का परचम लहराया!
लगन लगाकर राष्ट्रभक्ति का,
सुषुप्त चेतना पुनः जगाया!
मराठा साम्राज्य के संस्थापक,
वे अमृत कलश के पानी थे!
वीर शिवाजी महाराज,
मुगलों के लिए सुनामी थे!
स्वरचित मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित.
✍️चंद्रगुप्त नाथ तिवारी
सुंदरपुर बरजा आरा (भोजपुर) बिहार
Varsha_Upadhyay
20-Feb-2024 05:11 PM
Nice
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Gunjan Kamal
20-Feb-2024 02:25 PM
👏🏻👌🏻
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Mohammed urooj khan
20-Feb-2024 12:07 PM
👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾
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