Sandeep Kumar

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लेखनी प्रतियोगिता -20-Feb-2024

आंखें 2 से 4 हो गया तुम्हें देखा और प्यार हो गया
ना समझा ना जाना तुम हो कौन बट मुझे स्वीकार हो गया
देखते रहा राह तेरी कि तुम आओगी और इंतजार हो गया 
ना जाने कैसे तुमसे मुझे बेइंतहा प्यार हो गया।।

तेरे चेहरे मेरे नैनों के सामने आता गया बस आता गया 
नींद चैन मेरा उड़ाता गया और उड़ाता गया 
तुम क्या चीज हो ना जाने कैसे तुमसे इतना लगाव हो गया
ना जाने कैसे तुमसे मुझे बेइंतहा प्यार हो गया।।

हर तरफ तेरी सूरत दिखती है चांद भी फीका यार हो गया
सूरज का भी दिव्या रोशनी तेरे सामने लगता फीका हो गया
यह रंग बिरंगी दुनिया सादा सादा हो गया
ना जाने कैसे तुमसे मुझे इतना प्यार हो गया।।

संदीप कुमार अररिया बिहार

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7 Comments

RISHITA

22-Feb-2024 12:56 AM

V nice

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नंदिता राय

21-Feb-2024 11:46 PM

Nice

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Varsha_Upadhyay

21-Feb-2024 06:48 PM

बहुत खूब

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