मंगल पांडे
यह गाथा हैं अगुवाई की,
गोली से छिड़ी लड़ाई की।
मंगलपांडे की राष्ट्रभक्ति,
गोरों पर प्रथम चढ़ाई की।।
तब शौर्य दिखा पहचान दिया,
ऐसा अतुलित बलिदान दिया।
शोषण अत्याचार से क्षुब्ध,
गांडीव हाथ में थाम लिया।।
ये बात हैं पहली क्रांति की,
सैनिकों में पनपी भ्रांति की।
कारतूस की चर्बी से फैली,
वीरों के बीच अशांति की।।
बैरकपुर के सैनिकों ने,
बागी रूप दिखा डाला।
सैनिक विद्रोह आंदोलन ने,
गोरों का गला दबा डाला।।
गोरों ने अब ठान लिया,
जलती अग्नि बुझाने को।
मंगल को फाँसी दे डाला,
अब क्रांति चले दबाने को।
फिर महायुद्ध प्रचंड हुआ,
भारत के कोने-कोने में।
भोजपुर, झाँसी,कानपुर,
हर कस्बे और हर टोले में।।
ये राष्ट्र हैं uन परवानों की,
आजादी के दीवानों की।
तप-त्याग, समर्पण राष्ट्रभक्ति,
मंगल के अमिट निशानों की।।
सैनिक क्रांति की अलख जगा,
मंगल ने दी कुर्बानी थी।
बागी बलिया उत्तरप्रदेश के,
लाल की यही कहानी थी।।
🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳
स्वरचित मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित..
✍️चंद्रगुप्त नाथ तिवारी
आरा (भोजपुर) बिहार
Gunjan Kamal
04-Apr-2024 01:57 AM
👌🏻👏🏻
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Mohammed urooj khan
24-Feb-2024 12:48 PM
👌🏾👌🏾👌🏾
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Babita patel
24-Feb-2024 11:49 AM
V nice
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