चापलूस
चापलूस
आधार छंद-- पीयूष वर्ष/आनंदवर्धक सममात्रिक
परिचय-- महा पौराणिक वर्ग भेद (6765)
मापनी -SISS-SISS-SIS
पदांत-- IS, III
चापलूसों से बढ़े नित शान है।
चापलूसी भी अनोखा ज्ञान है।।
है जहाँ सब चापलूसों से भरा।
शर्म कुछ आती नहीं इनको जरा।।
बॉस को मक्खन लगाते रात दिन।
काम धेले का न हो बस माल गिन।।
हो तरक्की या बढ़े वेतन कभी।
लूटते हैं मौज देखो ये सभी।।
खा मलाई फिर डकारें दूध भी।
जो मिले मौका स्वीकारें घूँस भी।।
हस्त सिर पर धारने में हैं कुशल।
वक्त पलटे तो बदलते शीघ्र दल।।
जात इनकी है निराली जान लो।
बात मेरी यह सही है मान लो।।
भक्त ये भगवान के होते नहीं।
साथ जीवन में खड़े होते नहीं।।
गर गरज हो तो गधा भी बाप है।
खत्म मतलब तो कहें क्या आप हैं।।
लोभ लालच के हमेशा यार हैं।
वक्त बदले तो बदलते प्यार हैं।।
आभार - नवीन पहल - १६.०३.२०२४🙏🏻🙏🏻
# दैनिक प्रतियोगिता हेतु कविता
Mohammed urooj khan
18-Mar-2024 01:24 PM
👌🏾👌🏾👌🏾
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Gunjan Kamal
17-Mar-2024 07:23 PM
शानदार प्रस्तुति
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Varsha_Upadhyay
16-Mar-2024 10:29 PM
Nice one
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