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लेखनी कहानी -18-Mar-2024

ज़िंदगी

चले थे,हम सफर पर ज़िंदगी,सपने कई लेकर
पता ना था,सफर ले जाएगा,राहें नई लेकर!
जहाँ देखें,वहाँ चहरा बदलता रंग दिखता है,
फिजा,हमको न जाने कौन सी राहें गई लेकर!!

जमाने ने दिये हमको,ज़ख़्म गहरे रई लेकर,
सहे हमने सितम सारे,ज़ुबा पर बस दई लेकर!
ख़फ़ा हैं या नहीं,कैसे बताएँ ज़िंदगी तुमको,
कहा फिर,अलविदा जग हसरतें दिल में भई लेकर!!

श्वेता दूहन देशवाल
मुरादाबाद उत्तर pradesh

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6 Comments

RISHITA

21-Mar-2024 06:24 AM

Amazing mam

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Mohammed urooj khan

19-Mar-2024 11:57 PM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Alka jain

19-Mar-2024 01:37 PM

Nice

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