Sadhana Shahi

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लेखनी कहानी -24-Mar-2024

दिनांक- 24,03.2024 दिवस- रविवार विषय -होली विशेषांक

जानें होलाष्टक का संपूर्ण इतिहास


भारतवर्ष त्योहारों का देश है यहांँ प्रत्येक माह के प्रत्येक सप्ताह में कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है और प्रत्येक त्योहार को मनाने के पीछे ऐतिहासिक, पौराणिक तथा वैज्ञानिक कारण विद्यमान है। इन्हीं त्योहारों में से एक त्योहार है होलाष्टक।

होलाष्टक शब्द का अर्थ


होलाष्टक शब्द होली और अष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है। जिसका अर्थ है होली के पूर्व का 8 दिन। होलाष्टक फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक रहता है। चूंँकि होलाष्टक होली से पूर्व अष्टमी तिथि से प्रारंभ होता है अतः इसे होलाष्टक कहा जाता है।

पंचांग के अनुसार इस साल होलाष्टक 17 मार्च 2024 से शुरू हुआ है और यह 24 मार्च सुबह 09 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगा।

इसके बाद 25 मार्च 2024 को रंगों की होली खेली जाएगी। होलाष्टक के 8 दिन तपस्या के होते हैं, इसके बाद रंग, गुलाल लगाकर खुशियों का त्योहार होली मनाया जाता है।

क्यों पड़ा था 2023 में 9 दिन का होलाष्टक?


जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि होलाष्टक 8 दिनों का होता है किंतु 2023 में तिथि में वृद्धि की वज़ह से होलाष्टक 8 दिन के स्थान पर 9 दिन का पड़ा था। यह फाल्गुन, शुक्ल, अष्टमी तिथि 27 फरवरी 2023 को प्रात: 12:59 मिनट से शुरू हुआ था और 7 मार्च 2023 को फाल्गुन की पूर्णिमा पर समाप्त हुआ था।

भारतीय मुहूर्त विज्ञान और ज्योतिष विज्ञान की मानें तो कोई भी कार्य तभी फलदायक होता है जब उसे शुभ मुहूर्त में सही तरीके से किया जाता है। यही कारण है कि भारतवर्ष में प्रत्येक त्योहार तिथि को ध्यान में रखकर ही किया जाता है।

होलाष्टक और उसकी पूजन विधि


हम देखते हैं कि आजकल बच्चे कहीं भी ,कभी भी लकड़ियों का ढेर इकट्ठा करके होलिका बना देते हैं। किंतु ऐसा कदापि नहीं करना चाहिए । होलिका होली से 8 दिन पूर्व अर्थात फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ही शुद्धता और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए बनाना चाहिए। इसे बनाने से पूर्व होलिका बनाने वाले स्थल को गाय के गोबर, गंगाजल और पानी मिलाकर लीप-पोतकर शुद्ध कर लेना चाहिए । कहने का तात्पर्य यह है कि होलिका वाले स्थान को पहले साफ़-सुथरा करके ही होलिका बनाना चाहिए। तत्पश्चात सूखे उपले, सूखी लकड़ी, सूखी घास व मध्य में होली का डंडा स्थापित किया जाना चाहिए। जिस क्षेत्र विशेष में होलिका बनाया जाता है वहांँ होली से पूर्व कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि वहांँ पर सूतक जैसा माहौल होता है।

साधना शाही, वाराणसी

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4 Comments

Mohammed urooj khan

01-Apr-2024 01:49 PM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Gunjan Kamal

30-Mar-2024 10:38 PM

बहुत खूब

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kashish

29-Mar-2024 12:18 PM

Amazing

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