Sadhana Shahi

Add To collaction

लेखनी कहानी -24-Mar-2024

होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक कथाएँ


1-प्रह्लाद और होलिका की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और हिरणकश्यप उनका परम विरोधी । अतः वह प्रहलाद को भी विष्णु भक्ति से विमुख करना चाहता था। उसने ऐसा करने के लिए बहुत सारे उपाय किए किंतु जब सारे उपाय निष्फल हुए तब उसने प्रह्लाद को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बंदी बना लिया और मृत्यु हेतु तरह- तरह की यातनाएंँ देने लगा। किन्तु प्रहलाद अपने भगवत भक्ति से टस से मस नहीं हुआ। बल्कि हिरणकश्यप जितनी ही यातनाएंँ देता प्रहलाद की भक्ति उतनी ही दृढ़ होती जाती, जिससे प्रहलाद का जीवन हर बार बच जाता। हिरणकश्यप को प्रहलाद को यातनाएंँ देते 7 दिन बीत गए किंतु प्रहलाद जीवित ही रहा। अपने भाई को इस प्रकार परेशान देखकर उसकी बहन होलिका अपने भाई के पास गई और उसने प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि को समर्पित कर उसका जीवन समाप्त करने का उपाय बताया । क्योंकि होलिका को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि वह कभी भी अग्नि से नहीं जलेगी। होलिका के इस योजना को हिरणकश्यप सहर्ष स्वीकार कर लिया। होलिका प्रहलाद को अपनी गोदी में लेकर बैठ गई उसके चारों तरफ लकड़ियों ,उपलों और घास- फूस का ढेर बनाकर उसमें अग्नि प्रज्वलित कर दिया गया। किंतु यह क्या ! अग्नि के प्रज्वलित होते ही प्रहलाद की जगह होलिका धू -धू कर जलने लगी और अंततः जलकर भस्म हो गई। और प्रहलाद सुरक्षित बच गया। क्योंकि होलिका के जलने के पश्चात अग्नि देवता पूरी तरह शिथिल और शांत हो गए थे। तभी से भक्ति पर आघात हो रहे इन आठ दिनों को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है। और फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को शुभ मुहूर्त में बुराई पर अच्छाई के प्रतीक स्वरूप होलिका दहन किया जाता है। और फिर अगली सुबह खुशी-खुशी होली का त्योहार मनाया जाता है।

साधना शाही, वाराणसी

   0
0 Comments