Sadhana Shahi

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लेखनी कहानी -24-Mar-2024

3- गोपियों और कृष्ण की कथा


ब्रज में होली का त्यौहार एक दिन न मनाकर पूरे 8 दिन मनाया जाता था। भगवान श्रीकृष्ण गोपियों और ग्वाल- बालों के संग पूरे 8 दिन तक होली खेलते थे और आठवें दिन धुलेन्डी (धूलेटी)के दिन जिसे हम आमतौर पर होली के नाम से जानते हैं, उन रंग में सने हुए वस्त्रों को अग्नि के हवाले कर दिया जाता था। तब से होली के पूर्व के 8 दिन को होलाष्टक के रूप में मनाया जाने लगा । यही कारण है कि कुछ क्षेत्र विशेष में होली से कुछ दिन पूर्व से ही लोग होली खेलना आरंभ कर देते हैं। देश के अन्य भागों में होलिका के अगली सुबह को होली कहा जाता है वहीं मथुरा , वृंदावन में इस दिन को धूलंडी /धूलेटी के नाम से जाना जाता है।

साधना शाही, वाराणसी

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