Yusuf

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महफील



इश्क पे भी ए हुजुर किसी का पहरा नहीं रहता।
जहां है इश्क सब गुलशन ;वहां सहरा नहीं रहता।।
  

इश्क पे ए हुजुर किसी का पहरा नहीं रहता।
जो महफिल में हंसते हैं;उनका जख्म गहरा नहीं रहता।।
  

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2 Comments

Mohammed urooj khan

22-Apr-2024 11:42 AM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Arti khamborkar

21-Apr-2024 03:13 PM

Superb

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