Gopal Gupta

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आवाज़ ए दिल

देवियों का चरित्र लगती है,
मंदिरों सी पवित्र लगती है,,

 रूह महकी है हर्फ महके हैं,
वह ग़ज़ल प्रेम इत्र लगती है,,

कल्पना से भी है अनूठा सच,
बात कितनी विचित्र लगती है,,

जिन्दगी  केनवाश  के  जैसी,
भावनाओ का चित्र लगती है,,

मुझ को रहने नहीं दे-ती तन्हा,
सब से अच्छी वो मित्र लगती है,,



Gopal Gupta "Gopal"

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3 Comments

Varsha_Upadhyay

03-May-2024 01:54 PM

Nice

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sachin goel

02-May-2024 10:56 AM

ठीक है

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Babita patel

02-May-2024 10:52 AM

V nice

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