प्रजातंत्र का पर्व

लोकतंत्र का पर्व


आधार छंद-- दोहा अर्ध सममात्रिक छंद

यति - 13,11

परिचय-- चार चरण 48मात्रा

पदांत--  गुरु लघु आवश्यक


लोकतंत्र का पर्व है, करना है मतदान।

प्रजातंत्र का गर्व हो, नेता सच पहचान।।


वादे वो झूठे करें, सत्ता के मद चूर।

धोखेबाजों से सदा, रखना खुद को दूर।।


कीमत अपनी जान लें, बेचना मत तू वोट।

लालच में आना नहीं, अगर दिखाएं नोट।।


धर्म अरु जाति को भुला, करना मत का दान।

अच्छे नेता यार हैं, जनता को वरदान।।


झूठे अरु मक्कार को, चुन मत लेना यार।

देश का ये सवाल है, अच्छी हो सरकार।।


आभार - नवीन पहल - ०२.०५.२०२४ 🙏🏻🙏🏻


# दैनिक प्रतियोगिता हेतु कविता 

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2 Comments

Varsha_Upadhyay

03-May-2024 11:12 PM

Nice

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Babita patel

03-May-2024 09:36 AM

V nice

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