Sadhana Shahi

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विचार (कविता )प्रतियोगिता हेतु-11-May-2024

विचार (नज़्म) प्रतियोगिता हेतु

सोचो- विचारों करो काज कोई, जग में हसाई कभी भी ना होगी।

शिद्दत से सबकी ही बातें सुनो तुम, वैसा ही करने का बनना न भोगी।

इच्छाओं को कभी ज़ाहिर न करना, जाने बेगाने तो बन जाओ रोगी।

देने सहारा ना आएगा कोई, आया तो बनकर रहेगा वो ढोंगी।

मन में कभी जो भड़क जाए शोला, सद्वृत्तियों से ठंडी करनी होगी।

कड़वे विचारों को लाना कभी ना, अच्छा ही सोचो बनो अच्छे गोगी।

असफलता जीवन में गहना पड़े तो, कहीं न कहीं चूक तुमसे ही होगी।

नादानियांँ मन जो करना है चाहे, बाल्यावस्था के बन जाओ चोगी।

अंतर्मन के दीपों को तुम जलाओ, कांति इसी से जीवन में होगी।

अपने विचारों को मैला करो ना, भवसागर मुक्ति की यह तो है डोंगी।

साधना शाही, वाराणसी

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1 Comments

Gunjan Kamal

03-Jun-2024 04:58 PM

👏🏻👌🏻

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