लेखनी कहानी -15-May-2024
भुल ना था
पश्चाताप के आलम में मैअपना वजूद खोज रहा विग्रह् के मनोरम मे मै रख कलम कुछ सोच रहा क्यो मैं अपने मां बाप की भूल था
उम्मीद उनकी मन पर रखकर नाकामयाबी से सोच रहा निस्काम को खुद पर रखकर उस दुखी मन से सोच रहा क्यो मैं अपनो के कर्मो की भूल था।
कमी मुझमें उस खुदा ने चाहकर, ना रखी थी कमी देख अपनो ने मेरे नसीब को मारकर ना की हसी थी उसकी असफलता हां मेरे कर्मो की भूल थी
रख सपना अपनो का अपने मन पर मेहमान बन देख रहा भूल अपनों की भूल कर दृढ मन पर अरमान बन कह रहा न मैं अपने मां बाप की ना भूल ना था
Gunjan Kamal
03-Jun-2024 03:53 PM
👌🏻👏🏻
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Mohammed urooj khan
15-May-2024 11:41 PM
👌🏾👌🏾👌🏾
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kashish
15-May-2024 08:18 PM
Amazing
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