Yusuf

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चाय


चाय

चाय की चुस्की में जो मिठास है,
वो तेरे होंठों की प्यास है।
तेरे संग बैठकर पीना चाय,
जैसे हो कोई मीठी रास है।

हर सुबह की पहली किरण में,
तेरा चेहरा, मेरी चाय का प्याला।
दिल में उठते अरमानों की तरह,
गर्मजोशी से भरता हर निवाला।

तू जब मुस्कुरा के कहे, “चाय होगी?”
मेरे दिल की धड़कन भी बढ़ जाती है।
तेरे हाथों की बनी वो एक प्याली,
जैसे हर दुख-दर्द भुला जाती है।

चाय की खुशबू में तेरी यादें बसी हैं,
जैसे सुगंध में हो गुलाब की बातें।
तेरे बिना ये शामें वीरान हैं,
और तेरे साथ, चाय की महफ़िलें सुहानी हैं।
चाय की प्याली और तेरा साथ,
इन लम्हों में छिपा है सारा संसार।
तेरी हंसी और चाय की मिठास,
इस इश्क को बनाते हैं बेमिसाल।

हर घूंट में तेरी मोहब्बत का एहसास,
तेरे बिना चाय का भी क्या मजा?
इश्क और चाय का ये संगम प्यारा,
जैसे कोई अधूरी कविता हो पूरी।

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2 Comments

hema mohril

23-May-2024 10:58 AM

Amazing

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Gunjan Kamal

22-May-2024 08:27 PM

बहुत खूब

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