सफलता का रहस्य
सफलता का रहस्य
सुकरात के विचार
सुकरात एथेंस एक प्राचीन दार्शनिक थे जिन्हें पाश्चात्य दर्शन के संस्थापक और नैतिक दार्शनिक में से एक के रुप में श्रेय दिया जाता है।
उनका मानना है कि अगर आप मजबूत बनना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी कमजोरियों को दूर करें तो फिर आप कुछ ही कर सकते हैं। दार्शनिक होने का अर्थ है, असफलता की स्थिति में भी अलग और विचारशील बने रहना। एक व्यक्ति ज्ञान या आत्मज्ञान चाहता है। वह व्यक्ति जो मुसीबत आने पर शांत और धैर्यवान हो।
किसी कठिन परिस्थिति में संतुलित तरीके से निपटना।
एक बार की बात है, एक व्यक्ति ने पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?
सुकरात ने उस इंसान को कहा कि वह कल सुबह नदी के पास मिले, वहीं पर उसे अपने प्रश्न का जवाब मिलेगा।
अब दूसरे दिन वह व्यक्ती नदी के पास मिला तो सुकरात ने कहा कि नदी में उतरकर उसकी गहराई नापो।
वह व्यक्ती नदी में उतरकर आगे की तरफ जाने लगा, जैसे ही पानी उस व्यक्ति के नाक तक पहुंचा, पीछे से सुकरात ने आकर अचानक से उसका मुंह पानी में डुबा दिया। वह व्यक्ति बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगा , कोशिश करने लगा, लेकिन सुकरात थोड़े ज्यादा मजबूत थे। सुकरात ने काफी देर तक उसे पानी में डुबोए रखा।
कुछ समय बाद सुकरात ने उसे छोड़ दिया और फिर उस व्यक्ति ने जल्दी से अपना मुंह पानी से बाहर निकालकर जल्दी जल्दी सांस ली।
सुकरात ने उस व्यक्ति से पूछा***जब तुम पानी में थे तो तुम क्या चाहते थे? उस व्यक्ती ने कहा, जल्दी से बाहर निकल कर सांस लेना चाहता था।
सुकरात ने कहा, यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। जब तुम सफलता को उतनी ही तीव्र इच्छा से चाहोगे जितनी तीव्र इच्छा से तुम सांस लेना चाहते थे तो तुम्हें सफलता निश्चित रूप से मिल जाएगी।
जीवन में यही छोटी छोटी बातों पर गौर करें सफलता निश्चित तौर पर मिलती है।
अभार 🙏🏻
गीता ठाकुर दिल्ली से
स्वैच्छिक प्रतियोगिता हेतु
अपर्णा " गौरी "
24-May-2024 09:50 PM
वाह परम सत्य
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HARSHADA GOSAVI
24-May-2024 09:18 PM
V nice
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