लेखनी
विषय लेखनी
शीर्षक बोल लेखनी कुछ तो बोल
विधा गीत
अमन चैन शांति गायब
सिंहासन हो डांवाडोल
डगमगा रही हो व्यव्स्था
बोल लेखनी कुछ तो बोल
आस्तीन में सर्प पल रहे
नाटक कितने छल छद्म के
खेल खिलाड़ी खेल रहे
नीति नियम रंग बदल के
पहले वाली बात कहां अब
लुप्त हुआ प्रेम अनमोल
सद्भावों की बहा सरिता
बोल लेखनी कुछ तो बोल
भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी
चोरी लूट सीनाजोरी
मुखर मुखमण्डल से
आश्वासन बातें कोरी
झूठे वादों प्रलोभन से
जन मन होता रमझोल
भटक रहे राही पथ में
बोल लेखनी कुछ तो बोल
जहां कदम लक्ष्य को बढ़ते
उतने ही वार गिराने को
मंजिल मिले राही को
बाधाये पथ भटकाने को
डोर खींच रहे रिश्तो की
ज्यों खरीद लिया हो मोल
निडरता से मुखरित होकर
बोल लेखनी कुछ तो बोल
रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
ऋषभ दिव्येन्द्र
27-Oct-2021 11:37 AM
बहुत ही बेहतरीन रचना 👌👌
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Niraj Pandey
26-Oct-2021 08:41 PM
बहुत ही बेहतरीन
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रमाकांत सोनी
26-Oct-2021 09:47 PM
आदरणीय बहुत-बहुत धन्यवाद
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Swati chourasia
26-Oct-2021 06:40 PM
Very beautiful 👌
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