चिड़िया की उड़ान
चिड़िया की उड़ान
गांव का दीनानाथ शहर में आकर दिनेश चतुर्वेदी बन जाना माना व्यवसायी बन मशहूर हो चुका है, अपने आज तक पहुंचने के लिए उसने जी जान से मेहनत की है ,गांव से आंखों में खुशहाल जिंदगी के सुनहरे सपने लेकर चला था मां से जल्दी वापस आने का वायदा भी करा था ,आते ही उसके गांव के जानकार ने शहर की एक बड़ी मिठाई की दुकान पर काम पर रखवा दिया मां ने कहा था दिवाली पर घर जरूर आ जाना पर दुकान के मालिक ने अभी दुकान पर ज्यादा काम है ,छुट्टी नहीं मिल सकती ऐसा कहकर उसकी गांव जाने की इच्छा को चूर चूर कर दिया मां का इंतजार बढ़ता जा रहा था मेहनती होने के कारण दुकान का मालिक उसको दुकान से छुट्टी नहीं देता था ,बार-बार मन करता एक बार जाऊं अपने घर एक बार चिड़िया की तरह उड़ कर अपने घर घूम कर आयूं ,अपने लोगों के पास जा कर पर न जा पाता दीनानाथ की मा ने इंतजार करते-करते सोच ही लिया अब मेरा दीनू घर वापस नहीं आएगा यह सोच उसकी पत्नी को भी शहर में ही भेज दिया शहर में आकर पत्नी ने पति से अपना काम शुरू करने की बात कही, पत्नी की बात सही लगने पर उसने एक छोटी सी दुकान खोल ही ली ,दिन रात मेहनत करके उसने अपनी पहचान बना ली ,वापस जाने की बात रात में ही सपने में सोच पाता था ,हर बड़े त्यौहार पर जाने की तो सोचता पर काम का बोझ और सीजन समझ ना जा पाता एक तरीके से वह शहर का ही हो गया गांव अब बहुत दूर हो गया था उससे गांव जाने की इच्छा इच्छा ही होकर रह गई ,मां हमेशा कहती मेरा दीनू एक दिन वापस जरूर आएगा पर न आ पाया दीनू मां के सामने । शहर में बहुत बड़ा समय बीत जाने पर अचानक दीनू को अपनी मां बहुत याद आ रही है क्यों ना जा पाया वह ऐसा क्या था जो वह ना जा पाया, वितान में उड़ती हुई चिड़िया को देखकर सोचता है मेरे से अच्छी तो यह चिड़िया है जो अपने घोंसले में तो वापस आती है, ऊंची से ऊंची उड़ान भी चिड़िया को अपने घोंसले में वापसआने से नहीं रोक पाती