Geeta thakur

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छबील (छबील का इतिहास)

छबील (छबील का इतिहास)

गुरू अर्जन देव शहीदी दिवस, पर सिख समुदाय दशकों से छबील नमक गुलाबी शरबत जनता को पिला कर सेवा कर रहा है। गुरू अर्जन देव ने सिखों को ईश्वर की इच्छा को आशीर्वाद और मिठाई के रुप में स्वीकार करना सिखाया था 

लोक प्रिय लोक कथाओं के अनुसार, मुगलों के आदेशों को अस्वीकार करने पर उन्हें दण्डित किया गया था।
गुरू अर्जन देव जी सिखों के पांचवें गुरू होने के साथ साथ चौथे गुरू रामदास जी और माता भानी जी के सुपुत्र थे।
छबील में पानी दूध गुलाबी शरबत केवड़ा के मिश्रण से बनी स्वादिष्ट शीतल छबील गुरू अर्जन देव जी की शहादत से गहराई से जुड़ी है। सिख समुदाय द्वारा जरूरत मंद लोगों को पेय जल वितरण करना सदियों से एक परम्परा रही है।

मुग़ल काल में गुरू जी को यातनाएं देकर इस्लाम कबूल करवाने की योजना बनाई। उसने पहले गुरू जी को कड़ी तेज धूप में भूखे प्यासे रखा। जब उसका गुरू जी पर कोई असर नहीं हुआ तो उसने लोहे के बड़े तवे पर बैठाया और उसके ऊपर गरम रेत गुरू जी पर डाली। लेकिन गुरू जी तब भी अपनी बात पर खड़े रहे, नहीं झुके, अडिरहे। इस प्रकार गुरू जी का देहान्त हो गया। उनके शरीर को रावी नदी में बहा कर ये कह दिया कि उन्होने नदी में स्नान करने की इच्छा जताई थी और वापिस नहीं लौटे जल समाधी ले ली।

गुरू जी द्वारा सहे गए इन्हीं कष्टों को ध्यान में रखते हुए और उनकी शहादत से प्रेरणा लेते हुए हर साल छबील लगाई जाती है। तपती धूप में लोगों को ठंडा शरबत पिलाया जाता है। कई गुरुद्वारों में इस महीने हर सप्ताह छबील लगाई जाती है।

गुरू अर्जन देव जी के शहीदी पर्व पर यह छबील लगाई जाती है। 

आपको कोटि कोटि नमन 🙏🏻


गीता ठाकुर दिल्ली से 
प्रतियोगिता हेतु

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1 Comments

Mohammed urooj khan

25-Jun-2024 11:29 PM

👌🏾👌🏾

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