Yusuf

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नाकामी


अब तो नाकामी ही तकदीर बनी जाती है
जिंदगी दर्द की तसवीर बनी जाती है
तेरा मिलना ही था मेराजे-मोहब्बत लेकिन
तुझसे दूरी मेरी तकदीर बनी जाती है

है करिश्मा यह अनोखा शबे-महजूरी का
तीरगी सुबह की तनवीर बनी जाती है
राहें मसदूद हैं, महदूद है दुनिया मेरी
जिंदगी हल्काए-जंजीर बनी जाती है

महफिले-हुस्न की थी जहन में हलकी सी झलक
वही फिरदौस की तस्वीर बनी जाती है
कौन-सा राज है दिल का जो नहीं उन पे अयां
खामोशी ही मेरी तकरीर बनी जाती है

आह की बे-असरी का भी मुझे होश नहीं
बे-खुदी जल्वाए-तासीर बनी जाती है
राजे-गम कैसे छुपाऊं कि खामोशी भी मेरी
मेरे एहसास की तफसीर बनी जाती है

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1 Comments

Mohammed urooj khan

25-Jun-2024 12:25 PM

👌🏾👌🏾👌🏾

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