राष्ट्र-संदेश
राष्ट्र-संदेश
राष्ट्र को हमें बचाना है,
प्यार का सबक सिखाना है।
कपटी-कुटिल,रक्त-लोलुप को,
राह दिखाना है-राष्ट्र को हमें बचाना है।।
फैला ये आतंक विश्व में,
करता तांडव नृत्य है।
अमन-चैन का दुश्मन यह तो,
ख़तरनाक कुकृत्य है।
मुँह बाए आतंकवाद को,
मार भगाना है-राष्ट्र को हमें बचाना है।।
दुश्मन के नापाक इरादे,
सफल नहीं होने देंगे।
माटी ख़ातिर लाल देश के,
दुश्मन से बदला लेंगे।
खोया जो सम्मान था पहले,
उसको पाना है-राष्ट्र को हमें बचाना है।।
क्या छोटा क्या बड़ा यहाँ पर,
सब तो भाई-भाई हैं।
मानवता बस एक धर्म है,
समझो,यही सच्चाई है।
जाति-पाँति व वर्ग-भेद को,
जड़ से मिटाना है-राष्ट्र को हमें बचाना है।।
गाँव-गाँव में,नगर-नगर में,
बस्ती-कुनबा,डगर-डगर में।
नदी-तड़ाग की लहर-लहर में,
सागर की हर भँवर-भँवर में।
प्रेम-भाव सँग श्रद्धा का,
परचम फहराना है-राष्ट्र को हमें बचाना है।।
जीवन धन्य वही जो,
न्यौछावर निज माटी पर।
जल-थल-अंबर अपने वतन की,
सबसे प्यारी थाती पर।
वतन-परस्ती की मस्ती को,
फिर से लाना है-राष्ट्र को हमें बचाना है।।
©डॉ0हरि नाथ मिश्र
9919446372
Arti khamborkar
21-Sep-2024 09:18 AM
fabulous
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madhura
14-Aug-2024 07:44 PM
V nice
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