GUDDU MUNERI

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खफाएं


     [ खफाएं ] 


बीवी और शौहर से अफजल रिश्ता नही कोई 

थोड़ी सी खफा पर करवट बदल लेता है हर कोई 


वो सो जाती थी उनके हिस्से की जगह छोड़कर 

देखकर जगह नजरिया बदल लेता है हर कोई ।।


इधर वो खफा, उधर वो खफा , मानता नही कोई 

खाने की प्लेटो की आवाजे, खफाए जाहिर करती है 


काम तो घर के पूरे होंगे खामोशी से सबके यहां 

जुबां बंद करके भी खफाए जाहिर हुआ करती है ।।


ये क्या सितम हम पर ढहाए जा रहा है 

छलकते गिलासो को जाम बनाया जा रहा है 


हमने  तो बस पूछा था कि खफा क्या ? है 

बस पूछने को ही इल्जाम बनाया जा रहा है ।।


ये आंखें गहराकर देखने का चलन कब आया 

हमारी मेहनत के हिसाब का अभी वक्त नहीं आया 


वो बैठे है दो चार लगाने को हमारे इंतजार में 

ये तो अच्छा है हमारा अभी वक्त नही आया ।।


   - गुड्डू मुनीरी सिकंदराबादी 

   - दिनांक : 21/09/2024






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3 Comments

Anjali korde

23-Jan-2025 06:10 AM

👌👌

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Arti khamborkar

19-Dec-2024 03:43 PM

amazing

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HARSHADA GOSAVI

06-Dec-2024 11:58 PM

Amazing

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