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इक्कीसवीं सदी की ये रफ़्तार देखिए





इक्कीसवीं  सदी  की  ये  रफ़्तार देखिए, 
बाज़ार   में  मंहगाईयों  की  मार देखिए! 

फ़नकार  भी  हैं  दोग़ले  किरदार देखिए, 
भुखमरी  की   रुत  में ये व्यापार देखिए! 

बिकता   यहाँ   ईमान   ख़रीदार  देखिए, 
रोटी की ज़द में सबको गिरफ़्तार देखिए! 

आदमी   भला    है   समझदार    देखिए, 
हालात   से  लाचार  है  अख़बार  देखिए! 

मौसम भी ये कितना है ख़ुशगवार देखिए, 
दफ़्न  होता  नयी  पीढ़ी का प्यार  देखिए! 

क्या  पड़ी   है  आपको   परिवार  देखिए, 
नहीं  तो  है  गर्दन  पे  ये  तलवार देखिए! 

गुल भी है गुलपोश  अब  गुलज़ार देखिए, 
सरकार मुफ़लिसी का  ये विस्तार देखिए! 

ज़ंजीर  भी  लोहे  की  है  लोहार   देखिए, 
सीने  में   है  महफ़ूज   वो  अंगार  देखिए! 

शीशे  में  ये पत्थर  की  है  सरकार देखिए, 
जन-गण के हाथ में खुला हथियार देखिए! 
+++++++++++++++++++++++++
मुफ़लिसी=ग़रीबी

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16 Comments

hema mohril

26-Mar-2025 05:11 AM

amazing

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Virendra Pratap Singh

26-Mar-2025 01:48 PM

Thank you Hema Jee.

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Babita patel

27-Jan-2025 12:08 PM

V nice

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Virendra Pratap Singh

27-Jan-2025 01:34 PM

बहुत बहुत धन्यवाद बबिता

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madhura

24-Jan-2025 05:24 AM

👌👌👌

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Virendra Pratap Singh

27-Jan-2025 01:35 PM

धन्यवाद मधुरा जी।

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