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लेखनी कविता -14-Jan-2025

#दिनांक:-14/1/2025
#शीर्षक:-घी-दही संग बनाओ।

विष्णु ने अज्ञात असुर सिर,
सिर गाड़ दिया मंदराचल पर
जीत सभी संक्रांति पर्व मनाये,
रविचंद्र मकर संक्रांति।

चीनी की चटनी, गुड़ का डुंडा,
तिल का लोध मन को भाये।
कुरई में चावल लाई चुरा,
घी दही संग दांत खाये।

राज्यों में अनेक नाम प्रसिद्ध,
कहीं खानदानी कहीं लोहड़ी तो,
कहीं पोंगल माघी, उत्तरायण, कहीं
देशवासी मकर संक्रांति बुलाए।

पोंगल तमिल समुदाय त्योहार,
फसल कटाई व्याख्यात्मक।
बुरी आदत छोड़ने का संकल्प,
नया साल शिक्षा उत्सव मनाए।

घर साफ करोली रंग सजाकर,
वर्षा धूप कृषि की शुरुआत कर।
अनेक परम्पराएँ, रीति का पालन,
सूर्य, गौमाता बैल को पूजते हैं।

(स्वरचित)
प्रतिभा पांडे "प्रति"
चेन्नई

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8 Comments

hema mohril

26-Mar-2025 05:11 AM

awesome

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Babita patel

27-Jan-2025 12:08 PM

V nice

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madhura

24-Jan-2025 05:24 AM

👌

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