ये यादें -03-Jul-2025
प्रतियोगिता हेतु
दिनांक: 03/07/2025
ये यादें
बार- बार तेरी याद और
यादों से निकलती हर दिन
एक नई बात
उफ्फ, परेशान कर देती है
जीना बेहाल कर देती है।
पुरानी बातें कभी दिल को
कमज़ोर करती हैं तो
कभी आँखो को आँसूओ से भर देती हैं।
धड़कनें कमज़ोर पड़ जाती हैं
यादें दिन- रात सताती हैं।
वक्त़ गुज़रता रहता है
कहता कुछ नहीं बस
आगे बढ़ाता रहता है।
यादें इर्द-गिर्द घूमती रहती हैं,
ज़िंदगी में यही अब रंग भर देती हैं।
ख़्वाबों में जब कई ख़्वाब देखें थे हमने
आज वही ख़्वाब दिल में चुभते हैं
कह नहीं पाते कुछ पर
परेशानी का सबब बनते हैं।
यादें ज़िंदगी भर पीछा करती हैं
अंतिम सांस तक साथ निभाती हैं।
ये यादें....
वाकई ये यादें बहुत अलग होती हैं...
शाहाना परवीन'शान'...✍️