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ए-दिल तू इतना हैंरान क्यों है ।

ए-दिल, तू इतना हैरान क्यों है? तेरी चाहत में इतना गुमान क्यों है? दिल ये मेरा बेज़ार सा हुआ क्यों, धड़कनें ये मेरी परेशान क्यों है? ए-दिल, तू इतना हैरान क्यों है?

दौड़ती हवाओं-सा है मिज़ाज तेरा, फिर मेरी ठहरी नज़रों से अंजान क्यों है? ए-दिल, तू इतना हैरान क्यों है? पाक मोहब्बत मैंने की थी तुझसे, फिर गलत  इस सिलसिले का अंजाम क्यों है? ए-दिल, तू इतना हैरान क्यों है?

दर्द जाहिर कर रहा आपना सामने तेरे, फिर इसे नजरअंदाज करना आसान क्यों है? ए-दिल, तू इतना हैरान क्यों है? ...

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