Komal Khatri

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मन 30-Jul-2025

               मन 

मन ये मेरा चंचल बड़ा,
आसमान में उड़ना चाहे ।

पंख लगाकर पंछियों संग,
नील गगन को छूना चाहे।

रंग बिरंगी तितलि बन,
 बगीचे में घूमने जाऊ।

तरह - तरह के फूलों का जाकर,
मीठा - मीठा रस पी आऊ।


कोमल खत्री, हजारीबाग ( झारखंड)।

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