गीत 24 september-2025
गीत
ऐ दादा राम हो---- ---!
हां भैया लक्ष्मण।
दादा हो मां सीता नहीं है कुटिया में।
जंगल- जंगल घुम- घुम थक गया मैं
नहीं मिली मां नदी घाटों में।
देखा नहीं किसी ने मां को धारा की इन राहों में।
ऐ दादा राम हो----।
हां भैया लक्ष्मण।
दादा हो पुकारों ना मां को अपनी आवाज़ों में।
ऐ दादा पुकारों ना ऐ सीते कहां हो तुम।
सुनेंगी आप की आवाज़ लौट आएंगी मां अपने आवास।
ऐ दादा राम हो----।
हां भैया लक्ष्मण।
दादा हो मिल गई खबर मां सीता की।
देखा है पक्षी राज़ जटायु ने।
दुष्ट रावण उठा ले गया अपने उड़न खटोले में आकाश की
राहों से।।
ले गया रावण समंदर पार श्रीलंका में
कोशिश करी थी हजार जटायु ने मां सीता को दुष्ट रावण से छुड़ाने की।
काट दिए पंख निर्दयी रावण ने पक्षी राज़ जटायु की।
दर्द से तड़प रहा जटायु पड़ा है राहों पर ।
सांसें गिन- गिन कर रहा बेसब्री से इंतिज़ार आप के आने की है उसके मुख में पावन नाम श्री राम की।
ऐ दादा राम हो----।
हां भैया लक्ष्मण।
कैसे पहुंचें दादा श्रीलंका के उस पार हो ----------!
खड़ी है सामने इतनी बड़ी समंदर।
है नहीं कोई नांव ना ही बंधी हुई है कोई पूल।
नज़र नहीं आता कहीं कोई राह।
ऐ दादा राम हो--------!
हां भैया लक्ष्मण।
दादा हो मिल गए राहों में पवन पुत्र महाबली हनुमान
लगाएंगे छलांग पहुंचेंगे उस पार।
हैं साथ में उनके सुरवीर अंगद रीछ राज जामवंत नल और नील।
मिला है एक वरदान नल और नील को उनके छुते ही पत्थर भी तैरते हैं पानी में।
ऐ दादा राम हो --------------!
हां भैया लक्ष्मण।
दादा हो श्रीलंका के विशाल समंदर के बीच में बन गई पूल
पावन नाम श्री राम नाम लिखी पत्थरों से।
छीड गयी जंग प्रभु श्री राम और राक्षसों के राजा रावण के बीच।
हो गया सर्वनाश राक्षसों का मिट गया साम्राज्य सोने की बनी लंका की।
हो गए विजय श्री प्रभु राम राक्षस राज रावण का वध कर के ।
लौट आयी सीता मां रावण के कैदखाने अशोक वाटिका से।
खिल उठा है पूरा संसार बुराई के उपर अच्छाई की जीत देखकर।
ऐ दादा राम हो-------!
हां भैया लक्ष्मण।
दादा हो हो गई वनवास खत्म लौटेंगे अब घर हम ।
पहुंचेंगे कब हम अपने जन्म भूमि अयोध्या नगरी में।
ऐ दादा राम हो---- ------! ऐ दादा राम हो----!