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विसर्जन मन के दोषों का -28-Aug-2025

प्रतियोगिता हेतु 
दिनांक: 28/08/2025

विसर्जन मन के दोषों का

विसर्जन मन के दोषों का कर दिया मैंने...
यह कहना आसान है दोस्तों,
पर क्या सचमुच कोई ऐसा कर पाता है?
क्या मन के दोषों से मुक्त होना इतना सरल है?

लाखों में कोई विरला ही होगा जो
मन के दोषों का विसर्जन कर पाता है,
बाक़ी के लिए यह राह कठिन होती है।

केवल कह देने से विसर्जन नहीं होता,
मन और आत्मा को वश में करना पड़ता है,
अपने विचारों पर नियंत्रण पाना पड़ता है,
दूसरों के दोषों को अनदेखा करना पड़ता है।
तभी जाकर हम सच्चे मन से कह सकते हैं...
"विसर्जन मन के दोषों का मैंने कर दिया।"

शाहाना परवीन'शान'...✍️

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